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महात्मा गांधी: अहिंसा और सत्य के पुजारी-new

12:12 PM Aug 02, 2024 IST | kiran Saraswat
महात्मा गांधी  अहिंसा और सत्य के पुजारी new

महात्मा गांधी, जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता और आधुनिक भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे। उन्हें 'राष्ट्रपिता' के रूप में भी जाना जाता है। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।

प्रारंभिक जीवन

गांधी जी का जन्म एक संपन्न और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान (मुख्य मंत्री) थे और उनकी मां पुतलीबाई एक धर्मपरायण महिला थीं। गांधी जी का विवाह 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा माखनजी से हुआ था।

शिक्षा और प्रारंभिक करियर

गांधी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में प्राप्त की। 1888 में, वे कानून की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड चले गए और 1891 में भारत वापस लौटे। एक वकील के रूप में उन्होंने मुंबई में अभ्यास करना शुरू किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। 1893 में, उन्हें एक वर्ष के अनुबंध पर दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय फर्म के लिए काम करने का प्रस्ताव मिला, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष

दक्षिण अफ्रीका में, गांधी जी को रंगभेद और भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने भारतीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष शुरू किया और 'सत्याग्रह' की अवधारणा विकसित की, जिसका अर्थ है 'सत्य के प्रति आग्रह'। उन्होंने अहिंसा और सविनय अवज्ञा के माध्यम से अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

गांधी जी 1915 में भारत लौटे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। उन्होंने अहिंसा, सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ जनांदोलन शुरू किए। 1919 में, जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद, गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू किया, जिसमें लाखों भारतीयों ने भाग लिया।

महत्वपूर्ण आंदोलन

  • असहयोग आंदोलन (1920-1922): गांधी जी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसमें विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और ब्रिटिश संस्थानों से दूरी बनाने का आह्वान किया गया।
  • नमक सत्याग्रह (1930): गांधी जी ने नमक कानून के खिलाफ दांडी मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 240 मील पैदल यात्रा की।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): गांधी जी ने 'करो या मरो' का नारा देकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने का आह्वान किया।

गांधी जी का दर्शन

गांधी जी का जीवन और दर्शन सत्य और अहिंसा पर आधारित था। उन्होंने हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने और अहिंसा के माध्यम से संघर्ष करने का समर्थन किया। उन्होंने स्वराज, स्वदेशी और ग्राम स्वराज के सिद्धांतों को अपनाया। उनके विचार आज भी दुनिया भर में प्रेरणास्रोत हैं।

मृत्यु

30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी जी की हत्या कर दी गई। उनकी मृत्यु के बाद भी उनके विचार और सिद्धांत लोगों को प्रेरित करते रहे हैं और उनका जीवन आज भी एक आदर्श के रूप में देखा जाता है।

महात्मा गांधी का जीवन एक महान प्रेरणा है और उनकी शिक्षाएं आज भी दुनिया भर में प्रासंगिक हैं। उन्होंने दिखाया कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए भी अन्याय और अत्याचार के खिलाफ सफलतापूर्वक संघर्ष किया जा सकता है। उनकी शिक्षाएं और सिद्धांत आज भी हमें न्याय, स्वतंत्रता और मानवता के लिए लड़ने की प्रेरणा देते हैं।

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